पूर्व-मध्यकालीन भारत
गुर्जर-प्रतिहार-राजवंश
गुर्जर-प्रतिहार-राजवंश की स्थापना नागभट्ट प्रथम ने की थी।
प्रतिहार-राजवंश का उदय मन्दौर (जोधपुर) में हुआ था।
गुर्जर-प्रतिहार-राजवंश की दो शाखाएँ-उज्जैन एवं कन्नौज शाखाएँ थीं।
प्रतिहार-राजवंश के प्रसिद्ध शासक वत्सराज, नागभट्ट द्वितीय, मिहिरभोज हुए।
प्रतिहार-राजवंश का सर्वाधिक प्रतापी एवं महान शासक मिहिर भोज हुआ।
राष्ट्रकूट-राजवंश
राष्ट्रकूट-राजवंश की स्थापना दन्तिदुर्ग ने की थी।
एलोरा में प्रसिद्ध कैलाश मन्दिर का निर्माण कृष्ण
प्रथम ने करवाया था।
नटराज की मूर्तियाँ राष्ट्रकूटकालीन काल की प्रमुख
कृतियाँ हैं
पाल-राजवंश
पाल-वंश का संस्थापक गोपाल था।
पाल-वंश का सबसे प्रतापी एवं योग्य शासक धर्मपाल था।
पाल-वंश का शासन भारत के बंगाल एवं बिहार के भू-भाग
पर था|
प्रसिद्ध विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना
धर्मपाल ने करवाई थी।
पाल-वंश के पतन के बाद बंगाल पर सेनवंश का शासन हुआ।
प्रसिद्ध चन्दावर के युद्ध में मोहम्मद गौरी ने
जयचन्द को, 1194 ई० में पराजित किया था।
चंदेल-वंश
चंदेल-वंश की स्थापना
नन्नुक ने की थी।
चंदेलों ने अपनी राजधानी
खजुराहो में बनाई थी।
यशोवर्मन ने अपनी राजधानी
महोवा में बनाई थी।
चंदेल-वंश के परमल ने, 1203 ई० में शासक ने कुतुबुद्दीन ऐबक की अधीनता
स्वीकार कर ली थी ।
राष्ट्रकूट-राजवंश
राष्ट्रकूट-राजवंश की स्थापना दन्तिदुर्ग ने की थी।
एलोरा में प्रसिद्ध कैलाश मन्दिर का निर्माण कृष्ण
प्रथम ने करवाया था।
नटराज की मूर्तियाँ राष्ट्रकूटकालीन काल की प्रमुख
कृतियाँ हैं
चंदेल-वंश की स्थापना
नन्नुक ने की थी।
चंदेलों ने अपनी राजधानी
खजुराहो में बनाई थी।
यशोवर्मन ने अपनी राजधानी
महोवा में बनाई थी।

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