अजमेर और दिल्ली का चौहान-वंश

चौहान-वंश की स्थापना वासुदेव ने की थी।

चौहान-वंश के अजयपाल शासक ने अजमेर नगर की स्थापना की थी।

चौहान-वंश के पृथ्वीराज तृतीय को शासक को 'राय पिथौरा' कहा जाता था।

चौहान-वंश का अन्तिम शासक पृथ्वीराज चौहान था।

तराइन का प्रथम युद्ध 1191 ई० में, पृथ्वीराज चौहान तथा मुहम्मद गौरी के बीच, जिसमें मुहम्मद बीच हुआ था।

तराइन का द्वितीय  1192 ई० में, पृथ्वीराज चौहान एवं मुहम्मद गौरी के बीच हुई थी, जिसमें पृथ्वीराज चौहान की पराजय हुई थी।

पथ्वीराज चौहान का राजकवि चन्दवरदाई था।

मध्य भारत के विख्यात हिन्दी महाकवि चन्दवरदाई  थे। पृथ्वीराज रासो नामक पुस्तक लिखी थी।

चोलवंश

चोलवंश की स्थापना विजयालय ने की थी।

'मदुरैकोण्ड' की उपाधि परान्तक प्रथम ने  शासक ने धारण की थी|

राजराज प्रथम ने शिवपादशेखर उपाधि धारण की थी।

चोलवंश के राजराज प्रथम ने  शासक ने तंजौर में द्रविड़ वास्तुकला-शैली के अन्तर्गत विश्वप्रसिद्ध मन्दिर राज राजेश्वर का निर्माण करवाया था।

राजराजेश्वर मन्दिर को बृहदीश्वर मन्दिर नाम से जाना जाता है|

चोलवंश का दूसरा सर्वाधिक प्रसिद्ध शासक राजेन्द्र चोल (राजेन्द्र प्रथम) था।