गुप्त-साम्राज्य
चौथी शताब्दी में भारत में गुप्त नये राजवंश का उदय हुआ।
गुप्त-वंश की स्थापना श्रीगुप्त ने की थी।
गुप्त-साम्राज्य का उदय भारत केप्रयाग के निकट कौशम्बी भाग में हुआ था ।
श्रीगुप्त ने महाराज की उपाधि धारण की थी।
श्रीगुप्त की मृत्यु के बाद गुप्त-वंश का शासक घटोत्कच हुआ, घटोत्कच के बाद गुप्त-वंश का शासक उसका पुत्र-चन्द्रगुप्त प्रथम था, गुप्त-वंश का प्रथम प्रतापी
राजा चन्द्रगुप्त प्रथम था ।
चन्द्रगुप्त प्रथम ने महाराजाधिराज कि उपाधि धारण की थी।
चन्द्रगुप्त प्रथम ने गुप्त संवत् चलाया था।
गुप्त-वंश के समुद्रगुप्त राजा को सिक्के पर वीणावादन करते हुए दिखाया गया है।
'भारत का नेपोलियन' समुद्रगुप्त को कहा जाता है ।
गुप्तकाल में राज्य की भाषा संस्कृत थी।
समुंद्रगुप्त ने अश्वमेधहर्ता की उपाधि धारण की थी।
समुद्रगुप्त के बाद उसका उत्तराधिकारी चन्द्रगुप्त द्वितीय हुआ।
गुप्त-वंश का सबसे प्रतापी राजा चन्द्रगुप्त द्वितीय था।
चन्द्रगुप्त द्वितीय ने विक्रमादित्य उपाधि धारण की।
कालिदास की महत्त्वपूर्ण रचनाएँ मेघदूतम्, कुमारसंभवम् एवं रघुवंशम् सी हैं।
वराहमिहिर चन्द्रगुप्त विक्रमादिव्य के नवरत्नों में एक एवं प्रसिद्ध
खगोलशास्त्री था!
वराहमिहिर का प्रसिद्ध ग्रंथ बृहत्संहिता है।
आर्यभट्ट चन्द्रगुप्त विक्रमादिव्य के नवरत्नों में एक एवं अपने समय के सबसे
बड़े गणितज्ञ थे । इन्होंने दशमलव प्रणाली का विकास किया था ।
दिल्ली में मेहरौली के निकट एक लौहस्तम्भ गुप्तकाल का बना हुआ है।
महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के अजन्ता की गुफाओं की कलात्मक चित्रकारी
गुप्तकाल की देन है।
बाणभट्ट ने 'हर्षचरित्र” लिखा है।
वर्द्धन-साम्राज्य का सबसे प्रतापी शासक हर्षवर्द्धन था।
हर्षवर्द्धन ने अपनी राजधानी कन्नौज में बनाई।
हर्षवर्द्धन का राजकवि बाणभट्ट था।
बाणभट्ट ने हर्षचरित्र और कादम्बरी पुस्तकों की रचना की है।
'यात्रियों में राजकुमार' ह्वेनसांग कहा जाता है।
ह्वेनसांग ने अपनी यात्रा के क्रम में नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन किया
था।
भारतीय इतिहास में अन्तिम हिन्दू-शासक हर्षवर्द्धन को कहा जाता है
पारसी-धर्म का संस्थापक जरथुष्ट था।
पारसियों का प्रसिद्ध धर्म-ग्रंथ अवेस्ता है ।
रेशम-मार्ग प्राचीनकाल में चीन एवं पश्चिम एशिया के बीच का व्यापारिक मार्ग
नाम प्रसिद्ध था।
अंकोरवाट का विष्णु-मन्दिर द्रविड़ शैली में बना है।
गुप्त-वंश की स्थापना श्रीगुप्त ने की थी।
गुप्त-साम्राज्य का उदय भारत केप्रयाग के निकट कौशम्बी भाग में हुआ था ।
श्रीगुप्त ने महाराज की उपाधि धारण की थी।
श्रीगुप्त की मृत्यु के बाद गुप्त-वंश का शासक घटोत्कच हुआ, घटोत्कच के बाद गुप्त-वंश का शासक उसका पुत्र-चन्द्रगुप्त प्रथम था, गुप्त-वंश का प्रथम प्रतापी राजा चन्द्रगुप्त प्रथम था ।
चन्द्रगुप्त प्रथम ने महाराजाधिराज कि उपाधि धारण की थी।
चन्द्रगुप्त प्रथम ने गुप्त संवत् चलाया था।
गुप्त-वंश के समुद्रगुप्त राजा को सिक्के पर वीणावादन करते हुए दिखाया गया है।
'भारत का नेपोलियन' समुद्रगुप्त को कहा जाता है ।
गुप्तकाल में राज्य की भाषा संस्कृत थी।
समुंद्रगुप्त ने अश्वमेधहर्ता की उपाधि धारण की थी।
समुद्रगुप्त के बाद उसका उत्तराधिकारी चन्द्रगुप्त द्वितीय हुआ।
गुप्त-वंश का सबसे प्रतापी राजा चन्द्रगुप्त द्वितीय था।
चन्द्रगुप्त द्वितीय ने विक्रमादित्य उपाधि धारण की।
कालिदास की महत्त्वपूर्ण रचनाएँ मेघदूतम्, कुमारसंभवम् एवं रघुवंशम् सी हैं।
वराहमिहिर चन्द्रगुप्त विक्रमादिव्य के नवरत्नों में एक एवं प्रसिद्ध खगोलशास्त्री था!
वराहमिहिर का प्रसिद्ध ग्रंथ बृहत्संहिता है।
आर्यभट्ट चन्द्रगुप्त विक्रमादिव्य के नवरत्नों में एक एवं अपने समय के सबसे बड़े गणितज्ञ थे । इन्होंने दशमलव प्रणाली का विकास किया था ।
दिल्ली में मेहरौली के निकट एक लौहस्तम्भ गुप्तकाल का बना हुआ है।
महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के अजन्ता की गुफाओं की कलात्मक चित्रकारी गुप्तकाल की देन है।
बाणभट्ट ने 'हर्षचरित्र” लिखा है।
वर्द्धन-साम्राज्य का सबसे प्रतापी शासक हर्षवर्द्धन था।
हर्षवर्द्धन ने अपनी राजधानी कन्नौज में बनाई।
हर्षवर्द्धन का राजकवि बाणभट्ट था।
बाणभट्ट ने हर्षचरित्र और कादम्बरी पुस्तकों की रचना की है।
'यात्रियों में राजकुमार' ह्वेनसांग कहा जाता है।
ह्वेनसांग ने अपनी यात्रा के क्रम में नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन किया था।
भारतीय इतिहास में अन्तिम हिन्दू-शासक हर्षवर्द्धन को कहा जाता है
पारसी-धर्म का संस्थापक जरथुष्ट था।
पारसियों का प्रसिद्ध धर्म-ग्रंथ अवेस्ता है ।
रेशम-मार्ग प्राचीनकाल में चीन एवं पश्चिम एशिया के बीच का व्यापारिक मार्ग नाम प्रसिद्ध था।

0 Comments