भारत पर ईरानी तथा यूनानी आक्रमण
भारत पर सर्वप्रथम ईरान ने
देश ने आक्रमण किया था ।
फिलिप मकदुनिया प्रदेश का राजा था ।
सिकंदर ने हिन्दूकुश पहाडी
दरें को पार कर भारत में प्रवेश किया था ।
मौर्य-वंश की समाप्ति के
बाद मौर्य-वंश के सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने मौर्य-वंश के अन्तिम शासक वृहद्रथ को
मारकर पाटलिपुत्र पर अधिकार कर लिया और शुंग-वंश की नींव डाली।
पुष्यमित्र शुंग ने
पाटलिपुत्र के अतिरिक्त दूसरी राजधानी विदिशा पर बनायी।
पुष्यमित्र शुंग के शासनकाल
में भागवत धर्म का उत्थान हुआ।
महाभारत को शुंग-वंश के
शासनकाल में दुबारा लिखा गया।
भारत का स्तूप पुष्यमित्र
शुंग के शासनकाल में बनवाया गया था|
कण्व-वंश की स्थापना वसुदेव
ने की और अन्तिम शासक देवभूति की हत्या कर कण्व-वंश की स्थापना 73 ई०पू० में की।
कण्व-वंश का अन्तिम शासक
सुशर्मा था।
कलिंग पर से मौर्य-शासन
समाप्त होने के बाद वहाँ चेदिवंश का शासन रहा।
चेदि-वंश का सबसे महान शासक
खारवेल था।
सातवाहन काल में दक्षिण
भारत में तीन राज्यों का उदय हुआ- चोल, पांड्य और चेर ।
तमिल में लिखित कविताओं का
संग्रह संगम साहित्य है ।
मिलिन्द ने मिलिन्दपन्द
ग्रंथ की रचना की थी।
मिलिन्द की राजधानी शाकल थी।
इण्डो-ग्रीक कंधार में
राज्य करते थे।
शक भारत के उत्तर-पश्चिमी
भारत के भू-भाग पर आकर बसे।
शक-वंश का सबसे योग्य शासक
रूद्रदामन था ।
कुषाण चीन के यूचि जाति की
एक शाखा थी, जो भारत के उत्तरी-पश्चिमी क्षेत्र पर अपना शासन स्थापित करने में सफल हुए थे।
भारत में चमड़े से जूता
बनाने का प्रचलन कुषाणकाल में प्रारंभ हुआ था।
कुषाण-वंश का सबसे
शक्तिशाली तथा योग्य सम्राट कनिष्क था।
कुषाणकाल में बुद्ध की
मूर्तियाँ बहुतायत संख्या में बननी शुरू हुई ।
गंधार के साकारों ने इस विषय में
यूनानी कला का अनुसरण किया ।
गंधार ले कलाकारों ने तपस्या में सबद की मूर्ति को
बड़े ही सुन्दर रूप में उभारा है।
मथुरा की बुध्द मूर्तियों
पर भारतीय की अधिक गहरी छाप है ।
इस शैली की मूर्तियाँ लाल बलूए पत्थर की बनी होती
हैं इसे मथुरा-शैली कहते हैं ।
बिना सर का कनिष्क की कांसे
की मूर्ति मथुरा स्थान से प्राप्त हुई है।
कुषाण-युग में मथुरा नगर , नोय मूर्तिकला का एक बड़ा केन्द्र था|
कुषाण-वंश का अन्तिम शासक
वासुदेव था ।

0 Comments