मगध

आधनिक बिहार का पटना और गया जिला तथा शाहाबाद (बक्सर) का कुछ  क्षेत्र मगध साम्राज्य का भाग था|

जरासन्ध वृहद्रथ पुत्र था ।

बिम्बिसार मगध की गद्दी पर 544 ई०पू० में बैठा ।

बिम्बिसार की राजधानी राजगृह थी ।

बिम्बिसार का सम्बंध हर्यक वंश से था ।

बिम्बिसार ने अंग राज्य के चम्पा बंदरगाह को जीता था ।

बिम्बिसार की मृत्यु के बाद मगध राज्य की गद्दी पर अजातशत्रु, 492 ई०पू० में  बैठा और अजातशत्र का उपनाम कूणिक था ।

अजातशत्रु के शासनकाल में पहला बौद्ध संगीति का आयोजन हआ था ।

भारतीय इतिहास में पितृहन्ता के नाम से -अजातशत्रु को याद किया जाता है ।

अजातशत्रु की मृत्यु के बाद मगध राज्य की गद्दी पर अजातशत्रु का पुत्र उदयभद्र (उदयिन) बैठा था ।

उदयभद्र (उदयिन) ने मगध पर 460 से 444 ई०पू० तक शासन किया था ।

हर्यक वंश का अंतिम शासक नागदशक था ।

उदयभद्र के शासनकाल में मगध की राजधानी पाटलिपुत्र को बनाई गई

हर्यक वंश की समाप्ति के बाद मगध पर शिशुनाग वंश का शासन स्थापित हुआ था ।

शिशुनाग के बाद मगध की गद्दी पर कालाशोक (काकवर्ण) बैठा था ।

शिशुनागवंश का अंतिम शासक नन्दिवर्द्धन था ।

शिशनागवंश की समाप्ति के बाद मगध पर नन्दवंश का शासन स्थापित हुआ और  नन्द-वंश की स्थापना महापद्यानन्द ने की थी ।

नन्द-वंश का अन्तिम शासक धनानन्द था ।