सूफी एवं भक्ति आन्दोलन

ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती, जिन्होंने यहाँ चिश्तिया परम्परा की स्थापना की मुहम्मद गौरी के साथ सूफी भारत आये थे।

मुरीद-जो लोग सूफी-सन्तों से शिष्यता ग्रहण करते हैं, उन्हें मुरीद कहा जाता है ।

सूफी, जिन आश्रमों में निवास करते हैं, उसे खानकाह कहा जाता है|

हजरत निजामुद्दीन औलिया-ये भारत के प्रसिद्ध सूफ़ी-संत थे ।

शोखा सालीम चिश्ती-ये अकबर के समकालीन थे। अकबर ने संतान के लिए इसी प्रसिद्ध साफी सत्ता के दरमाह में मन्नता मानी थी।

शांकराचार्य शंकराचार्य केरल के रहनेवाले थे। उन्होंने अद्वैतवाद-सिद्धान्त का प्रतिपादन किया । उन्होंने देशा के चारों कोने में एक एक मठ स्थापित किया ।

साम्मानुजा-यामानुज दक्षिण भारत के प्रसिद्ध वैष्णव भक्त थे। उन्होंने भक्तिमार्ग का उपदेश दिया । उनका विश्वास था कि सच्चे मन से ईश्वर को समर्पित करने से मुक्ति का माग मिलता है।

मलिक मुहम्मद जायसी- ये एक प्रसिद्ध सूफी संत थे। इन्होंने 'पद्मावत' नामक प्रसिद्ध पुस्तक की रचना की ।

रामानन्द-भक्ति-आन्दोलन को दक्षिण से उत्तर भारत लाने का श्रेय रामानन्द को ही जाता है।

कबीर-एक महान समाज-सुधारक के रूप में उन्होंने समाज में व्याप्त हर तरह की बुराइया के विरुद्ध संघर्ष किया ।

तुलसीदास-तुलसीदास हिन्दी साहित्य के बहुत बड़े कवि थे और उन्होंने विश्वप्रसिद्ध रामचरितमानस की रचना की थी।

संत तुकाराम-संत तुकाराम का सम्बंध महाराष्ट्र से है । उन्होंने भक्तिभाव से ईश्वर की प्राप्ति का उपदेश दिया ।

मीराबाई-मीराबाई का सम्बंध राजस्थान से था । उन्होंने भोग-विलास का जीवन त्यागकर सच्चे मन से भगवान श्रीकृष्ण की भक्तिनी बन गई।

गुरु नानक-पंजाब में भक्ति-आन्दोलन को सफल बनाने का श्रेय गुरु नानक को है। वे सिक्ख-धर्म के संस्थापक एवं प्रथम गुरु थे । इनकी वाणी को सिक्खों के धार्मिक ग्रन्थ मे  संकलित किया गया है।

सूरदास-सूरदास का सम्बंध आगरा से था । वे नेत्रहीन कवि थे और उनकी रचनाओं में कृष्णभक्ति का रस मिलता है । उनका प्रसिद्ध ग्रंथ सूरसागर है । इसमें उन्होंने श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का वर्णन किया है।