वैदिक काल युग
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जिन लोगों
ने वैदिक सभ्यता की नींव डाली,
वे आर्य थे और इनका मूल निवास
स्थान मध्य एशिया था। वहीं से ये लोग भारत में आकर बस गये । ये मध्य एशिया से
विश्व के अनेक स्थानों में बस गये, लेकिन जिन लोगों ने भारत को अपना निवास स्थान बनाया,
ये इंडो-आर्य कहलाये, आर्य का अर्थ होता है श्रेष्ठ ।
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वैदिक
सभ्यता को आर्य-सभ्यता (Aryan-civilization) कहा जाता है क्योंकि इस सभ्यता के निर्माता आर्य थे, इसलिए इस
सभ्यता को आर्य-सभ्यता कहते हैं और इस काल में वेद की रचना हुई थी तथा इस सभ्यता
के काल के सारे ज्ञान वेदों (ऋग्वेद,
सामवेद, अथर्ववेद और
ययुर्वेद) पर आधारित हैं, इसलिए इसे वैदिक सभ्यता भी कहा जाता है।
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आर्यों की
सभ्यता-संस्कृति का ज्ञान ऋग्वेद से प्राप्त होता है ।
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वेदों की
कुल संख्या चार हैं-(i) ऋग्वेद,
(ii) सामवेद, (ii) यजुर्वेद
एवं (iv) अथर्ववेद।
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सबसे प्राचीन
वेद ऋग्वेद है ।
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वैदिककाल
में राजा के सलाहकार को पुरोहित कहा जाता था ।
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वैदिक युग
में सर्वोच्च अधिकारी राजा (राजन) होता था ।
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आर्यसमाज के
कई परिवारों के समूह को ग्राम कहा जाता था ।
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आर्यों ने
लोहा धातु की खोज की थी ।
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आर्य
पुरोहितों को दक्षिणा में गाय और एपिसा वस्तुएं दिया करते थे।
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वैदिककाल
में सर्वप्रिय देवता इन्द्र देवता है ।
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आर्यों के
बीच गाय के लिए लड़ाई हुआ करती थी ।
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वैदिक काल
में दो महान पुरोहित हुए थे,
उनका नाम वशिष्ठ और
विश्वामित्र है ।
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वैदिककाल
में परिवार के प्रधान को कुलप कहा जाता था ।
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वैदिककाल
में आर्यों के भारत आने से पहले यहाँ बसने वाले मूल निवासी दस्यु कहलाते थे।
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प्राचीनकाल
के महाकाव्य का नाम रामायण एवं महाभारत है ।
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वैदिककाल का
समय 1000 ई० पू० से 600
ई० पू० तक है ।
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ऋग्वेद को
छोड़कर शेष धर्मग्रंथों की रचना वैदिककाल में हुई थी ।
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उपनिषद्
साहित्य एक प्रकार का दार्शनिक साहित्य है। उपनिषदों के ज्ञान का सार-वत्व
है-परमात्मा में व्यक्तिगत आत्मा का विलीन होना।
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'सत्यमेव जयते'
शब्द मुण्डकोपनिषद् से उद्धत है ।
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पुराण एक
धर्मग्रन्थ है, जिसकी संख्या 18
है।
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600 ई० पू० में उत्तर भारत में 16 महत्त्वपूर्ण
राज्य थे, जिसे महाजनपद कहा जाता था। जिनका विवरण निम्नलिखित है-
महाजनपद राजधानी आधुनिक क्षेत्र
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मगध गिरिजज/राजगृह पटना, गया, आरा
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अंग चन्पा भागलपुर के क्षेत्र
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वत्स कोसम या कौशंबी इलाहाबाद के आस पास
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काशी वारानसी वाराणसी
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कोशल अयोध्या फैज़ाबाद
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अवंति उज्जैन मालवा छेत्र
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पंचाल काम्पिल्य बरेली व फरुखाबाद
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वज्जि वैशाली मुज्जफ्फरपुर व दरभगा
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चेदि शक्तिमती यू.पी.
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मल्ल कुशिनगर देवरिन्या व गोरखपुर
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कांधार तक्शशिला पेशावर
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कम्बोज हातक राजौरी
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कुरु इंद्रप्रस्थ दिल्ली
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शुरशेन मथुरा मथुरा
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मत्स्य विराट्नगर राज्स्तान, अलवर, जयपुर
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अशमक पोटली
गोदावरी नदी के किनारे

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